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पाकिस्तान अब लश्कर-ए-तैयबा को लेकर मुश्किल में फंस गया

on मार्च 09,2009

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आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में आगे रहने का दावा करने वाला पाकिस्तान अब लश्कर-ए-तैयबा को लेकर मुश्किल में फंस गया है। पहले मुंबई हमले और अब लाहौर में हुए हमले की जांच में लश्कर का हाथ सामने आ रहा है। पाकिस्तान की मुश्किल ये है कि 2001 में भारतीय संसद पर हमले की घटना के बाद उसने पश्चिमी देशों को आश्वासन दिया था कि वह लश्कर की गतिविधियों पर अंकुश लगाएगा।

भारतीय संसद पर हमले में लश्कर का हाथ सामने आने के बाद पाकिस्तान पर चौतरफा दबाव था कि इस आतंकवादी संगठन को जड़ से उखाड़ फेंके। एक पाकिस्तानी अधिकारी के मुताबिक उस वक्त अमेरिका व ब्रिटेन समेत पश्चिमी देशों से कहा गया था कि लश्कर का नेटवर्क इतना ज्यादा फैला हुआ है कि उसे जड़ से उखाड़ने पर पाकिस्तान में सुरक्षा के लिए समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। पाकिस्तान ने हालांकि यह आश्वासन दिया था कि वो लश्कर की गतिविधियों पर अंकुश रखेगा। वो यह ध्यान रखेगा कि अगर लश्कर के प्रशिक्षण शिविर बंद नहीं हो पाते तो उनमें तैयार होने वाले आतंकी दूसरे देशों को न जा पाएं।

मुंबई हमले में लश्कर की संलिप्तता की बात सामने आ चुकी है। आतंकी संगठन के आपरेशनल कमांडर जकीउर रहमान लखवी को इस सिलसिले में हिरासत में लेने का दावा खुद पाकिस्तान कर रहा है। अब लाहौर हमले में भी लश्कर का हाथ देखा जा रहा है। जांचकर्ताओं का मानना है कि ये हमला लश्कर के आतंकियों ने किया जो इलाके से अच्छी तरह परिचित थे।

इन खुलासों से ये स्पष्ट हो चुका है कि पाकिस्तान पश्चिमी देशों को दिए आश्वासन पर खरा नहीं उतरा है। ब्रिटेन ने ये मुद्दा प्रमुखता से उठाया भी है। प्रधानमंत्री गार्डन ब्राउन भी पाकिस्तान को उस आश्वासन की याद दिला चुके हैं।

पश्चिमी देशों को शक है कि लाहौर हमला लश्कर ने लखवी व अन्य आतंकियों की गिरफ्तारी का बदला लेने के लिए किया था। यह भी स्पष्ट हो चुका है कि लश्कर की गतिविधियां अब सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं हैं। उसने तालिबान व अल-कायदा से भी गठजोड़ कर लिया है।

धर्मार्थ संस्थाओं के जरिये आतंक को मिल रहा धन

अमेरिका का कहना है कि पाकिस्तान की कई धर्मार्थ संस्थाएं न सिर्फ आतंकी संगठनों को धन मुहैया करवा रही हैं, बल्कि उनके लिए प्रचार व भर्ती का काम भी कर रही हैं।

लश्कर से जुड़े जमात-उद-दावा जैसे संगठन धर्मार्थ कार्यो के लिए मिलने वाले धन को हवाला के जरिए आतंकियों तक पहुंचाते हैं। इसके अलावा वे कंट्टरपंथी विचारधारा के प्रचार और लोगों को संगठन से जोड़ने का काम भी करते हैं।


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