'ब्लैक मनी' पर नजर रखने के लिए सरकार ने अब बीमा कंपनियों का सहारा लिया है। इसके लिए एक वित्त वर्ष के भीतर 50 हजार रुपये से ज्यादा की बीमा प्रीमियम राशि नगदी से करने पर रोक लगा दी गई है। बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण ने एक अधिसूचना जारी कर यह साफ कर दिया है कि इससे ज्यादा राशि का प्रीमियम केवल चेक, डिमांड ड्राफ्ट, क्रेडिट कार्ड या बैंकों के जरिए ही अदा किए जा सकते हैं। इसके साथ ही बीमा कंपनियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे बड़ी बीमा प्रीमियम राशि पर कड़ी नजर रखें और रकम के स्त्रोत को लेकर भी सावधान रहें। इरडा का यह नया निर्देश इस बात की गवाही देता है कि काले धन की रोकथाम और देश में मनी लांड्रिंग पर रोक लगाने के लिए सरकारी एजेंसियां किस हद तक जा सकती हैं। नियामक ने बीमा कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे मनी लांड्रिंग से संबंधित नियमों को अपनी तरफ से परिभाषित नहीं करें। ऐसा करने पर उन्हें कड़ी सजा भुगतने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। इस निर्देश से बीमा कंपनियों में थोड़ी बेचैनी भी है, क्योंकि मंदी की वजह से उनके कारोबार पर भी असर पड़ा है। बीमा कंपनियों पर पहले ही 'अपने ग्राहकों को जानो' संबंधी नियम लागू हो चुके हैं जिसके बाद उन्हें कुछ परेशानी हो रही है। अब किसी भी व्यक्ति को बीमा पालिसी बेचने से पहले उसके बारे में तमाम जानकारियां जुटानी होती हैं। इरडा ने नया दिशानिर्देश उस समय दिया है, जब देश में सबसे ज्यादा पालिसियां बेची जाती हैं। भारत में अभी भी फरवरी और मार्च में सबसे ज्यादा बीमा करवाया जाता है। दरअसल, लोग टैक्स बचाने के इन महीनों में बीमा पालिसी करवाते हैं। बीमा कंपनियों को इसलिए ज्यादा चिंता हो रही है। इरडा ने साफ तौर पर कहा है कि उसने यह कदम बीमा क्षेत्र में मनी लांड्रिंग की रोकथाम के लिए उठाया है। प्राधिकरण ने यह भी कहा है कि उसने बतौर प्रीमियम 50 हजार रुपये से ज्यादा के नकदी भुगतान पर रोक तो लगाई है, लेकिन बीमा कंपनियों को इससे बहुत कम प्रीमियम राशि के लिए भी चेक, डिमांड ड्राफ्ट वगैरह लेने की व्यवस्था लागू करनी चाहिए।