मुख्यमंत्री मायावती ने उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय [यूपीटीयू] से संबद्ध निजी इंजीनियरिंग कालेजों की सीटों में वर्तमान सत्र में आरक्षण व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया है। उन्होंने उप्र शैक्षणिक कक्षाओं में प्रवेश [अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण अधिनियम] अधिनियम, 2006 के प्राविधानों का अक्षरश: अनुपालन करने को कहा है। मुख्यमंत्री के आदेश के चलते यूपीटीयू से सम्बद्ध निजी इंजीनियरिंग की सीटों में अनुसूचित जातियों को 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजातियों को 2 प्रतिशत और अन्य पिछड़े वर्गों को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि बसपा सरकार सर्वसमाज के हितों का पूरा ख्याल रखती है। सरकार खासतौर पर समाज के दबे-कुचले और गरीब वर्गों को शिक्षा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
शासन का कहना है कि आरक्षण के मुद्दे पर विगत 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उसने विधिक राय ली थी। बाद यह पाया गया कि निजी इंजीनियरिंग कालेजों ने संबद्धता के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र हासिल करते समय 28 नवंबर 2008 को शैक्षणिक सत्र 2009-10 की यूपीटीयू की प्रवेश संबंधी समिति की बैठक में आरक्षण अधिनियम 2006 के तहत आरक्षण की व्यवस्था लागू करने की सहमति दी थी। इसी आधार पर सरकार ने निजी कालेजों में आरक्षण लागू करने का निर्देश दिया है।