मुंबई। कृषि उत्पादन में कमी से चालू वित्तीय वर्ष में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 5.1 प्रतिशत से घटकर 4.8 फीसदी रह जाएगी। आर्थिक थिंक टैंक सेंटर फार मानिटरिंग इंडियन इकनामी [सीएमआईई] ने यह आकलन लगाया है।
सीएमआईई की मासिक रपट में कहा गया है कि हमने 2009-10 के लिए अपने औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर के अनुमान को 5.1 प्रतिशत से घटाकर 4.8 प्रतिशत कर दिया है। सीएमआईई ने मानसून के ठंडेपन की वजह से औद्योगिक उत्पादन के अनुमान को घटाया है। रपट में कहा गया है कि कृषि उत्पादन में कमी का सीधा असर 2009-10 के दौरान जीडीपी की वृद्धि दर पर पड़ेगा। साथ ही इसका वृद्धि दर पर अप्रत्यक्ष असर भी पड़ेगा।
सीएमआईई ने कहा है कि गन्ने की उपज में आठ प्रतिशत की गिरावट के अनुमान की वजह से 2009-10 के लिए चीनी के उत्पादन अनुमान को भी घटा दिया है। साथ ही खाद्य तेलों के उत्पादन अनुमान में भी कमी की गई है।
रपट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान उद्योगों को कृषि से संबंधित कच्च्चे माल की कमी का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, इस दौरान उनकी क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। क्षमता में यह वृद्धि मुख्य रूप से गैर कृषि उद्योगों में देखने को मिलेगी। रपट में कहा गया है कि इस दौरान सीमेंट की उत्पादन क्षमता में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, जबकि अल्युमीनियम की उत्पादन क्षमता 25 फीसद बढ़ेगी। वाणिज्यिक वाहनों की क्षमता 50 फीसद बढ़ेगी, जबकि कारों की क्षमता में इस दौरान 25 प्रतिशत और दोपहिया की क्षमता में 18 फीसद का इजाफा होगा।
रपट में कहा गया है कि क्षमताओं में वृद्धि का औद्योगिक उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ेगा। यही वजह है कि हमें चालू वित्त वर्ष में औद्योगिक उत्पादन में 4.8 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है, जबकि 2008-09 में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 2.4 फीसद रही थी।