जौनपुर, उन्होंने जिंदगी भर आरएसएस, जनसंघ व भारतीय जनता पार्टी की खिदमत की। सादगी व इमानदारी की प्रतिमूर्ति रहे। दो बार मुल्क की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा के सदस्य रहे। उत्तर प्रदेश सरकार में समाज कल्याण विभाग के कैबिनेट मंत्री रहे। जिनका जिक्र हो रहा है उनका नाम है राम सागर। इस समय 69 वर्षीय सागर मुफलिसी के संकट भरे दौर से गुजर रहे है। इनके पास अपना और परिवार का इलाज करवाने तक के लिए पैसा नहीं है।
केराकत तहसील के गोमती दरिया पार दक्षिण स्थित ग्राम बेहड़ा में अत्यंत गरीबी के माहौल में जन्मे राम सागर राम ने बचपन से ही समाजसेवा के लिए सियासत को चुना व राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जिला प्रचारक राजनेत सिंह के संपर्क में आए। जल्दी ही उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की नजर में अपना स्थान बना लिया और 1969 में जनसंघ से विधानसभा की दहलीज पर अपनी दस्तक दे दी। 1970 में त्रिभुवन नारायन के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार में हरिजन व समाज कल्याण मंत्री बनाए गए। अपने मंत्रित्व काल में नगर वधुओं के दर्द को करीब से समझने का प्रयास करते हुए इस प्रथा को समाप्त करने हेतु उन्होंने कई नगर वधुओं की शादी करवाई व उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा-दीक्षा दिलाने की पहल भी की।
1975 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में आपातकाल लगाकर विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया। इनमें राम सागर राम भी थे। बहरहाल 1977 में राम लोकसभा के आम चुनाव में जनता पार्टी के बैनर तले सैदपुर से लोकसभा चुनाव प्रचंड बहुमत से जीतकर लोकसभा सदस्य बन गए। वर्ष 1989 में भी हुए लोकसभा के चुनाव में जीतकर दोबारा सांसद बने। इसके बावजूद कभी भी उनपर भ्रष्टाचार की तोहमत नहीं रही। यही वजह रही कि न तो वे बंगला बनवा सके और न चार पहिया वाहन ही खरीद सके। गरीबी के शिकार रामसागर राम अपना इलाज कराने के लिए सगड़ी जैसे साधन का सहारा लेने पर मजबूर है।