अंबानी बंधु ने केजी बेसिन की गैस के बंटवारे पर अपना मनमुटाव तो खत्म कर लिया और इसकी आपूर्ति के लिए आपस में करार भी कर लिया है। लेकिन इसे अमली जामा पहनाने में अभी वक्त लगेगा। दरअसल, अभी इस करार पर सरकार की मंजूरी भी लेनी है। इसके लिए मुकेश अंबानी समूह को सरकार के समक्ष यह साबित करना होगा कि उनके केजी बेसिन के गैस फील्ड में अभी काफी ज्यादा गैस है। साथ ही अनिल अंबानी समूह को सरकार के समक्ष अपनी उन बिजली परियोजनाओं की स्थिति का खाका भी पेश करना होगा जिसके लिए वे बड़े भाई की कंपनी से गैस लेना चाहते हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक अभी तक मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज [आरआईएल] और अनिल अंबानी की रिलायंस नेचुरल रिसोर्स [आरएनआरएल] के बीच हुए समझौते के बारे में सरकार को कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। जैसे ही इस बारे में सूचना दी जाती है सरकार इस पर विचार करेगी।
सूत्र बताते हैं कि इस समझौते को मंजूरी देने के लिए गैस आवंटन पर केंद्र सरकार की तरफ से गठित मंत्रियों के समूह [जीओएम] की विशेष बैठक बुलाई जा सकती है। समूह दोनों कंपनियों के बीच हुए समझौते के साथ ही गैस की उपलब्धता और परियोजनाओं की संभाव्यता रिपोर्ट को ध्यान में रखकर ही फैसला करेगा।
अभी तक मंत्रियों का समूह केजी बेसिन गैस फील्ड की गैस का आवंटन अपनी वरीयता सूची के आधार पर करता रहा है। केजी बेसिन की गैस पहले से तय किसी समझौते के आधार पर आवंटित नहीं की जाती। अभी तक आरआईएल ने केजी बेसिन से जितनी गैस निकलने की रिपोर्ट सरकार को सौंपी है उसके आधार पर आवंटन किया जा चुका है। इसका मतलब यह हुआ कि अनिल अंबानी समूह के किसी बिजली प्लांट को गैस आपूर्ति करने के लिए पहले से जिन उद्योगों को गैस आवंटन का वादा किया गया है उसमें कटौती करनी होगी।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक एक दूसरा उपाय यह है कि कई उद्योगों को गैस आपूर्ति में थोड़ी-थोड़ी कटौती कर एक हिस्सा अनिल अंबानी के बिजली प्लांट को दे दिया जाए। वैसे आने वाले दिनों में केजी बेसिन में गैस उत्पादन बढ़ने की संभावना है। उस बारे में ठोस प्रमाण मिलते ही सरकार के लिए फैसला करना आसान हो जाएगा।
मालूम हो कि पिछले हफ्ते कई महीनों की वैमनस्यता को मिटाते हुए दोनों अंबानी बंधु ने गैस आपूर्ति का एक नया समझौता किया है। मोटे तौर पर इस समझौते के मुताबिक आरआईएल के केजी बेसिन से गैस की आपूर्ति आरएनआरएल की बिजली इकाइयों को की जा सकेगी।
आरएनआरएल इस गैस के लिए सरकार की तरफ से तय कीमत अदा करेगी। अब गेंद सरकार के पाले में जाने की उम्मीद है। वहीं फैसला हो सके गा कि छोटे भाई की बिजली इकाइयों को कितनी मात्रा में गैस और कब दी जा सकेगी।