ब्रिटेन में संसद की 649 सीटों में से 550 सीटों के नतीजे घोषित किए जा चुके हैं जिनसे पता चलता है कि ब्रिटेन भी भारत की तर्ज पर गठबंधन की राजनीति की ओर बढ़ रहा है। सत्तारूढ़ लेबर को पीछे छोड़ते हुए कंजरवेटिव सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, लेकिन बहुमत से अभी दूर है। मतगणना के अभी तक जारी नतीजों के मुताबिक, कंजरवेटिव को 273, लेबर को 223, लिबरल डेमोक्रेट्स को 47 और अन्य को 27 सीटें मिली हैं।
भारतीय मूल की दो महिलाएं भी अपनी अपनी सीटें जीतने में सफल हुई हैं। कंजरवेटिव पार्टी की प्रीति पटेल और लेबर की वलेरी वाज चुनाव जीत गई हैं जो लेबर सांसद कीथ वाज की बहन हैं। ब्रितानी संसद के इतिहास में इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ जब भारतीय मूल की दो महिलाओं को सांसद चुना गया हो।
कीथ वाज भी लीसेस्टर ईस्ट की अपनी सीट दोबारा जीतने में कामयाब हुए हैं, लेकिन पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार पांच फीसदी कम वोट मिले हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई भाई-बहन एक साथ हाउस आफ कामन्स के लिए चुने गए हैं।
भारत में गठबंधन की राजनीति में 'सांसदों की खरीद-फरोख्त' जुमला बहुत प्रचलित है और अब ब्रिटेन में भी ऐसी स्थिति बन सकती है क्योंकि तीन बड़ी पार्टियों के नेता बहुमत के लिए जूझ रहे हैं।
इस चुनाव में सबसे ज्यादा निराशा लिबरल डेमोक्रेट्स को हुई है जिसके नेता निक क्लेग पहले टेलिविजन डिबेट के बाद छा गए थे। लिबरल डेमोक्रेट्स को सौ से ज्यादा सीटें जीतने की उम्मीद थी, लेकिन उसे अभी तक 51 सीटें ही मिली हैं, जबकि पिछले चुनाव में उसे 62 सीटें मिली थीं।
कंजरवेटिव नेता डेविड केमरून का कहना है कि प्रधानमंत्री गार्डन ब्राउन और लेबर पार्टी सत्ता में बने रहने का जनादेश खो चुकी है, क्योंकि कंजरवेटिव अकेले सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। केमरून ने कहा कि हमारा देश बदलाव चाहता है। इस बदलाव के लिए नए नेतृत्व की जरूरत है। उन्होंने इशारा किया कि अगली सरकार बनाने के लिए बातचीत के दरवाजे उनके लिए खुले हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए वह राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर कोई कदम उठाएंगे।
दूसरी ओर ब्राउन ने इस बात पर जोर दिया है कि ब्रिटेन के लिए एक 'मजबूत, स्थाई और सैद्धांतिक' सरकार सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है। इस बात का इशारा लिबरल डेमोक्रेट्स के साथ संभावित गठबंधन की ओर है।
ब्राउन ने कहा कि चुनाव के पूरे नतीजे अभी नहीं आए हैं, लेकिन ब्रिटेन के प्रति मेरी जिम्मेदारी है कि देश में एक मजबूत, स्थाई और सैद्धांतिक सरकार बने, लेकिन हो सकता है कि लेबर और लिबरल डेमोक्रेट्स मिलकर भी संसद के लिए बहुमत नहीं जुटा पाएं। सत्ता पाने के लिए उन्हें हर हाल में 326 का जादुई आंकड़ा हासिल करना होगा।
इसबीच भारतीय मूल के लेबर प्रत्याशी वीरेंद्र शर्मा ईजलिंग साउथाल से चुनाव जीत गए हैं। उन्होंने कंजरवेटिव के गुरशरन सिंह को नौ हजार से ज्यादा वोटों से हराकर सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। आलोक कुमार शर्मा भी कंजरवेटिव की ओर से रीड़िंग वेस्ट सीट जीत गए हैं। यह उन सीटों में एक है जहां कंजरवेटिव को लेबर पर जबर्दस्त जीत मिली है।
डेविड केमरून ने यहां तक मांग कर दी है कि ब्राउन को 10-डाउनिंग स्ट्रीट खाली कर देना चाहिए क्योंकि मतदाताओं ने लेबर पार्टी को नकार दिया है।